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नितिन नबीन को भाजपा अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया गया? वर्किंग प्रेसिडेंट योजना की व्याख्या

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राजनीतिक पर्यवेक्षकों को हैरान करते हुए नितिन नबीन को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (Working President) नियुक्त किया, बजाय इसके कि उन्हें सीधे भाजपा अध्यक्ष बनाया जाए। यह संगठनात्मक बदलाव इस बात का संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व संक्रमण और आगामी चुनावों की रणनीति को लेकर सोच रही है।


भाजपा के संसदीय बोर्ड ने 14 दिसंबर 2025 को यह निर्णय लिया। नितिन नबीन, जो कि बिहार के पांच बार के विधायक और नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं, को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया। यह पद भाजपा के इतिहास में केवल दूसरी बार इस्तेमाल किया गया है, जो दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व में अचानक बदलाव के बजाय धीरे-धीरे संक्रमण की रणनीति अपनाना चाहती है।


नितिन नबीन को सीधे पार्टी अध्यक्ष न बनाने के कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे पहले, यह पद पार्टी को संगठनात्मक स्थिरता बनाए रखते हुए नेतृत्व संक्रमण का अवसर देता है। भाजपा का नेतृत्व लंबे समय तक नरेंद्र मोदी और जेपी नड्डा जैसे मजबूत नेताओं के हाथ में रहा है, जिनके कार्यकाल में चुनावी सफलता और नीतिगत निरंतरता पर ध्यान केंद्रित किया गया। अब जब पार्टी पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारी कर रही है, भाजपा नेतृत्व चाहता है कि परिवर्तन धीरे और सुचारू रूप से हो।


वर्किंग प्रेसिडेंट के रूप में नितिन नबीन को देशभर में वास्तविक जिम्मेदारियां संभालने का अधिकार मिला है। इससे पार्टी की रणनीतिक कार्यप्रणाली और जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत होगा, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे केंद्रीय नेता प्रमुख फैसलों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। विश्लेषकों का मानना है कि यह तरीका आंतरिक संघर्ष को रोकने और संगठन में एकता बनाए रखने में मदद करेगा।


नितिन नबीन ने अपने नियुक्ति के बाद वरिष्ठ नेताओं के विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने देशभर के पार्टी कार्यकर्ताओं और केंद्रीय नेतृत्व के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। यह पद उन्हें भविष्य में पूर्ण पार्टी नेतृत्व के लिए तैयार करने का एक कदम भी माना जा रहा है।


संक्षेप में, नितिन नबीन को सीधे भाजपा अध्यक्ष नहीं बनाया गया क्योंकि पार्टी ने ‘वर्किंग प्रेसिडेंट’ के माध्यम से योजना बद्ध और रणनीतिक नेतृत्व संक्रमण अपनाने का निर्णय लिया। यह कदम अनुभव और निरंतरता के संतुलन के साथ पार्टी को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार करता है।