लेंसकार्ट आईपीओ की निराशाजनक लिस्टिंग के पीछे क्या कारण रहे: उच्च वैल्यूएशन और ग्रे मार्केट प्रीमियम में गिरावट का प्रभाव
आईवियर रिटेलर लेंसकार्ट सॉल्यूशंस लिमिटेड (Lenskart Solutions Limited) के शेयरों की आज (10 नवंबर 2025) शेयर बाजार में लिस्टिंग उम्मीद से कमज़ोर रही। ₹402 के इश्यू प्राइस के मुकाबले, कंपनी का शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर करीब 3% के डिस्काउंट के साथ ₹390 पर सूचीबद्ध हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भी शेयर ₹395 पर लिस्ट हुआ, जो कि इश्यू प्राइस से लगभग 1.74% कम था। शुरुआती कारोबार में ₹390 के आसपास कारोबार करता हुआ देखा गया। यह लिस्टिंग ऐसे समय में हुई है जब कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को निवेशकों से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी, और यह कुल मिलाकर 28.27 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
लेंसकार्ट के ₹7,278 करोड़ के आईपीओ को सभी श्रेणियों के निवेशकों से भारी बोलियां मिलीं थीं। योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) का हिस्सा 40 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ था, जबकि गैर संस्थागत निवेशक (NII) और खुदरा निवेशकों (Retail Investors) के हिस्से को भी कई गुना ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला था। इतना मज़बूत सब्सक्रिप्शन मिलने के बावजूद, शेयर का डिस्काउंट पर लिस्ट होना बाजार में लिस्टिंग गेन की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों के लिए एक झटका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी अच्छी सब्सक्रिप्शन के बाद लिस्टिंग में कमी मुख्य रूप से महंगे वैल्यूएशन और हाल ही में ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में आई तेज गिरावट के कारण हुई है।
विश्लेषकों ने पहले ही आगाह किया था कि भले ही लेंसकार्ट एक मजबूत ब्रांड है और इसका कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके वैल्यूएशन बहुत अधिक हैं, जिससे निवेशकों के लिए लिस्टिंग के दिन लाभ कमाने की गुंजाइश कम है। शुरुआती कारोबार में लिस्टिंग के तुरंत बाद शेयर ₹355.70 के निचले स्तर तक भी गिर गया था, जो इश्यू प्राइस से 11% से अधिक की गिरावट थी। हालांकि, बाद में कुछ खरीददारी देखने को मिली, जिससे शेयर ने ₹409.90 तक का उच्च स्तर भी छुआ और इश्यू प्राइस ₹402 के आसपास कारोबार करता रहा। यह उतार चढ़ाव दर्शाता है कि निवेशक इस शेयर के दीर्घकालिक संभावनाओं और इसकी महंगी कीमत को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं।
लेंसकार्ट ने वित्त वर्ष 2025 में ₹297 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया था, जो एक बड़ा बदलाव था। कंपनी की योजना इस आईपीओ से जुटाए गए फंड का उपयोग अपने बिज़नेस के विस्तार, नई दुकानों को खोलने और ग्लोबल स्तर पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने में करना है। हालांकि, बाजार की नजर अब इसकी आगे की तिमाही नतीजों और लाभप्रदता के रुझानों पर बनी रहेगी ताकि यह पता चल सके कि क्या कंपनी अपने उच्च वैल्यूएशन को सही ठहरा सकती है या नहीं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे लंबी अवधि के दृष्टिकोण के साथ शेयर में बने रहें, जबकि कम अवधि के ट्रेडर मुनाफे के लिए इसे बेच सकते हैं।