उत्तर प्रदेश: वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ मतदाताओं की छुट्टी, आखिर क्यों चला चुनाव आयोग का हंटर?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब चुनाव आयोग ने राज्य की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की। विशेष गहन पुनरीक्षण की लंबी और सघन प्रक्रिया के बाद, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से घोषणा की कि राज्य के लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम वर्तमान सूची से हटा दिए गए हैं। यह संख्या कुल पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 18.70% है, जो राज्य के लोकतांत्रिक इतिहास में एक बहुत बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
SIR क्या है और ये नाम क्यों गायब हुए?
निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया गया SIR अभियान एक 'शुद्ध निर्वाचक नामावली' तैयार करने का प्रयास था। इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया। ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने के मुख्य कारणों को चार श्रेणियों में बांटा गया है, जिन्हें कहा जाता है:
स्थानांतरित और अनुपस्थित : लगभग 2.17 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जो अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले या स्थायी रूप से कहीं और शिफ्ट हो चुके थे। मृत मतदाता : सत्यापन के दौरान 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए, जिनके नाम तकनीकी कारणों से अब तक सूची में बने हुए थे। डुप्लीकेट पंजीकरण : करीब 25.47 लाख ऐसे मामले सामने आए जहाँ एक ही मतदाता का नाम दो या उससे अधिक स्थानों पर दर्ज था।
शहरों में सबसे ज्यादा असर
इस कार्रवाई का सबसे व्यापक असर उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ में सबसे ज्यादा 30.04% मतदाताओं के नाम कटे हैं। इसी तरह गाजियाबाद, कानपुर और नोएडा जैसे शहरी इलाकों में भी बड़ी संख्या में नाम कम हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि शहरों में आबादी का पलायन और पते बदलना अधिक होता है, जिसके कारण सत्यापन के दौरान ये लोग अपने पुराने पतों पर नहीं मिले।
राजनीतिक घमासान और विपक्षी आरोप
इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" और एक "बड़ी साजिश" करार दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि जानबूझकर उन इलाकों में अधिक नाम काटे गए हैं जहाँ विपक्ष का आधार मजबूत है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इस पूरी प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अब क्या करें मतदाता?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक 'ड्राफ्ट लिस्ट' है और अंतिम सूची नहीं है। जिन लोगों के नाम गायब हैं, उनके पास अभी भी सुधार का मौका है: दावे और आपत्तियां: 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक मतदाता अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। फॉर्म-6 का उपयोग: यदि आप पात्र हैं और आपका नाम कट गया है, तो आप 'फॉर्म-6' भरकर दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन जांच: नागरिक या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर जाकर अपनी स्थिति देख सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा, जो आगामी चुनावों का आधार बनेगी।