अमेरिका में अपना बिजनेस बेचेगी टिकटॉक|
अमेरिकी बाजार में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक (TikTok) के लिए पिछले कुछ वर्षों से अमेरिका में मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। राष्ट्रीय सुरक्षा और यूज़र डेटा की गोपनीयता से जुड़ी चिंताओं के कारण, अमेरिकी सरकार लगातार टिकटॉक की चीनी मूल कंपनी बाइटडांस (ByteDance) पर दबाव बना रही थी। इस दबाव का नतीजा यह निकला कि बाइटडांस ने अमेरिका में अपने कारोबार को बेचने का एक बड़ा फैसला लिया है। यह कदम न सिर्फ टिकटॉक के भविष्य के लिए, बल्कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार और तकनीकी संघर्ष के संदर्भ में भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे मामले की शुरुआत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं से हुई। अमेरिकी सरकार का मानना था कि टिकटॉक, जो बाइटडांस के स्वामित्व में है, यूज़र्स का संवेदनशील डेटा चीनी सरकार के साथ साझा कर सकता है। इस डर को देखते हुए, अमेरिकी कांग्रेस ने एक ऐसा कानून पारित किया, जिसमें बाइटडांस को अमेरिकी संपत्ति किसी अमेरिकी कंपनी को बेचनी होगी, अन्यथा देश में टिकटॉक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। इस कानून के बाद, टिकटॉक के लिए अमेरिका में टिके रहना मुश्किल हो गया। अमेरिका ने कई बार इस डील को पूरा करने के लिए बाइटडांस को समय सीमा भी दी, और प्रत्येक बार यह समय सीमा बढ़ाई जाती रही।
हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत के बाद इस विवाद का एक महत्वपूर्ण समाधान निकला है। खबर है कि दोनों देशों के बीच एक रूपरेखा समझौता (Framework Deal) तय हो गया है, जिसके तहत अमेरिका में टिकटॉक का संचालन एक अमेरिकी कंपनी के हाथ में सौंप दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस डील में अमेरिकी कंपनियों का एक समूह शामिल होगा, जिसमें ओरेकल (Oracle) जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियां भी प्रमुख भूमिका में होंगी। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिका के 170 मिलियन से अधिक टिकटॉक यूज़र्स का डेटा पूरी तरह से अमेरिकी नियंत्रण में रहे और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हालांकि, इस समझौते से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलू अभी भी पूरी तरह से साफ नहीं हैं। जैसे कि, क्या टिकटॉक का एल्गोरिदम (Algorithm) जो ऐप की सफलता का मुख्य कारण है, वह भी अमेरिकी खरीदारों को दिया जाएगा या वह चीन के पास ही रहेगा। इस डील को लेकर राजनीतिक और व्यापारिक विश्लेषकों की राय भी अलग अलग है। कुछ का मानना है कि यह अमेरिका की जीत है क्योंकि उसने अपने नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है। वहीं, कुछ अन्य इसे चीन के लिए एक आंशिक जीत मानते हैं, क्योंकि कंपनी ने अपने एल्गोरिदम और कुछ मालिकाना अधिकार अपने पास रखने का रास्ता निकाल लिया है। यह डील न केवल टिकटॉक के भविष्य को आकार देगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भविष्य में तकनीकी कंपनियों के डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को कैसे हल किया जाता है।