वैश्विक पूंजी का बदलता रुख: लक्ष्मी मित्तल का ब्रिटेन से पलायन और उच्च करों के कारण धनी व्यक्तियों के लिए दुबई का बढ़ता आकर्षण
विश्व के स्टील उद्योग के दिग्गज और आर्सेलर मित्तल के कार्यकारी अध्यक्ष, लक्ष्मी निवास मित्तल, अब ब्रिटेन को छोड़कर दुबई में बसने की तैयारी कर रहे हैं। इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण ब्रिटेन में व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट स्तर पर लगातार बढ़ते टैक्स और व्यापार के लिए अनुकूल माहौल में कमी को माना जा रहा है। ब्रिटेन के आठवें सबसे अमीर व्यक्ति का यह कदम न केवल उनकी निजी वित्तीय रणनीति का हिस्सा है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों (HNIs) के बढ़ते पलायन की प्रवृत्ति को भी दर्शाता है। लंडन, जो दशकों से वैश्विक अमीरों का गढ़ रहा है, अब अपनी कठोर टैक्स नीतियों के कारण अपना आकर्षण खो रहा है।
लक्ष्मी मित्तल का यह फैसला ब्रिटेन की मौजूदा आर्थिक नीतियों के प्रति उनकी निराशा को उजागर करता है। ब्रिटेन में पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) की दरें बढ़ी हैं, और समग्र कर बोझ काफी अधिक है, खासकर उन व्यक्तियों के लिए जिनकी आय और संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। इसके विपरीत, दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है, जहां आय पर कोई व्यक्तिगत आयकर नहीं है, और व्यापार के लिए प्रोत्साहन और नियामक सरलताएं प्रदान की जाती हैं। यह अंतर मित्तल जैसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापारियों को अपनी संपत्ति के प्रबंधन और संवर्धन के लिए एक स्पष्ट वित्तीय लाभ प्रदान करता है।
इस पलायन का ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक वित्तीय प्रतिष्ठा पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। लक्ष्मीनिवस मित्तल जैसी प्रतिष्ठित शख्सियत का जाना यह संकेत देता है कि देश अपने सबसे धनी और सबसे सफल निवासियों को बनाए रखने में विफल हो रहा है। इससे न केवल कर राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि यह देश के व्यापार और निवेश के माहौल के बारे में एक नकारात्मक धारणा भी बनाता है। अन्य एचएनआई और संभावित निवेशक भी ब्रिटेन में निवेश करने या रहने के बारे में पुनर्विचार कर सकते हैं। यह पलायन ऐसे समय में हो रहा है जब ब्रिटेन ब्रेक्जिट के बाद आर्थिक अस्थिरता से उबरने की कोशिश कर रहा है और उसे विदेशी निवेश की सख्त जरूरत है।
दुबई में मित्तल का स्थलांतरण मध्य पूर्व को एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में और मजबूत करेगा। दुबई अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, आधुनिक बुनियादी ढांचे और व्यापार समर्थक नीतियों के कारण तेजी से पूंजी और प्रतिभा को आकर्षित कर रहा है। लक्ष्मी मित्तल जैसे उद्योगपतियों की उपस्थिति दुबई को अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कॉर्पोरेट मुख्यालयों के लिए एक पसंदीदा स्थान बनाने में मदद करेगी। भविष्य में, ब्रिटेन को अपने कर ढांचे को प्रतिस्पर्धी बनाने और व्यापार के अनुकूल माहौल बनाने के लिए गंभीर नीतिगत सुधार करने होंगे, अन्यथा उसे और अधिक आर्थिक पलायन का सामना करना पड़ सकता है। यह घटना वैश्विक पूंजी के बढ़ते गतिशीलता और राष्ट्रीय सरकारों के लिए एक सबक है कि अत्यधिक कर लगाना हमेशा अधिक राजस्व की गारंटी नहीं देता, बल्कि इसके विपरीत, यह देश से संपत्ति के पलायन का कारण बन सकता है।