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इसरो के आने वाले बड़े मिशन: गगनयान और आदित्य-एल1

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी (PSLV) एक दुर्लभ असफलता का शिकार हुआ। शुक्रवार को हुए PSLV-C61 मिशन में थर्ड स्टेज में तकनीकी खराबी आने के कारण उपग्रह अपने निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच पाए। यह इसरो का 101वां लॉन्च था और एजेंसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पीएसएलवी को अब तक “वर्कहॉर्स” यानी सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल माना जाता रहा है।


PSLV की सफलताओं का रिकॉर्ड

पीएसएलवी ने पिछले लगभग तीन दशकों में भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों में अहम भूमिका निभाई है। इस रॉकेट ने 1994 से लेकर अब तक 90 से अधिक सफल मिशन पूरे किए हैं। मंगलयान, चंद्रयान और कई कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च में PSLV की अहम भूमिका रही है। इस वजह से इसे इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट कहा जाता है। लेकिन C61 मिशन की असफलता ने इसके रिकॉर्ड पर सवाल खड़ा कर दिया है।


थर्ड स्टेज में आई तकनीकी खराबी

इसरो के वैज्ञानिकों के मुताबिक PSLV-C61 मिशन की पहली और दूसरी स्टेज सामान्य रहीं। लेकिन थर्ड स्टेज के इग्निशन के दौरान अचानक गड़बड़ी आ गई। इससे रॉकेट की गति प्रभावित हुई और उपग्रह निर्धारित कक्षा तक नहीं पहुंच सका। वैज्ञानिक फिलहाल खराबी के सही कारण की जांच कर रहे हैं। प्राथमिक अनुमान है कि थर्ड स्टेज के फ्यूल बर्न सिस्टम में तकनीकी खामी आई।


असर और प्रतिक्रियाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अंतरिक्ष एजेंसी के लिए 100 से अधिक मिशनों में एक असफलता तकनीकी जोखिम का हिस्सा है। फिर भी, यह झटका इसलिए बड़ा है क्योंकि PSLV को अब तक सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद रॉकेट माना जाता रहा है। सरकार और इसरो ने भरोसा जताया है कि जांच के बाद तकनीकी खामियों को दूर किया जाएगा और भविष्य के मिशन पर इसका असर नहीं पड़ेगा।


आगे का रास्ता

इसरो अब पूरी तकनीकी समीक्षा कर रहा है ताकि अगली बार ऐसी समस्या न हो। आने वाले महीनों में कई अहम लॉन्च निर्धारित हैं, जिनमें आदित्य-एल1 और गगनयान मिशन की तैयारियां भी शामिल हैं। PSLV-C61 की असफलता भले ही निराशाजनक हो, लेकिन इसरो की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को देखते हुए वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास बरकरार है।