All Trending Travel Music Sports Fashion Wildlife Nature Health Food Technology Lifestyle People Business Automobile Medical Entertainment History Politics Bollywood World ANI BBC Others

एचसीएल के शिव नाडर की ₹2,708 करोड़ की परोपकार गाथा: भारत में शिक्षा और कला को बढ़ावा देने में उनका अद्वितीय योगदान

एडलगिव-हुरुन इंडिया परोपकार सूची 2025 के अनुसार, एचसीएल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक शिव नाडर और उनके परिवार ने लगातार चौथी बार देश के सबसे बड़े परोपकारी का स्थान बरकरार रखा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में नाडर परिवार ने कुल ₹2,708 करोड़ का असाधारण दान दिया, जो औसतन प्रति दिन ₹7.4 करोड़ होता है। पिछले वर्ष की तुलना में उनके दान में 26% की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। यह उपलब्धि भारत के धनाढ्य वर्ग में बढ़ती परोपकार की भावना को रेखांकित करती है, जहां अब दान केवल कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) तक सीमित न रहकर व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का रूप ले रहा है। शिव नाडर का यह अथक योगदान मुख्य रूप से 'शिव नाडर फाउंडेशन' के माध्यम से शिक्षा, कला और संस्कृति पर केंद्रित रहा है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं के लिए अवसर और ज्ञान को बढ़ावा देना है।


इस सूची में, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और उनके परिवार ₹626 करोड़ के दान के साथ दूसरे सबसे बड़े परोपकारी बनकर उभरे हैं। अंबानी परिवार के दान में पिछले वर्ष की तुलना में 54% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका अधिकांश हिस्सा रिलायंस फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, ग्रामीण परिवर्तन और महिला सशक्तिकरण जैसे विविध क्षेत्रों में निर्देशित किया गया है। अंबानी और नाडर के बीच दान की राशि में बड़ा अंतर यह दर्शाता है कि नाडर का परोपकारी समर्पण किस हद तक व्यक्तिगत संपत्ति और सामाजिक जिम्मेदारी को प्राथमिकता देता है। शीर्ष 10 परोपकारी व्यक्तियों ने मिलकर कुल ₹5,834 करोड़ का दान दिया, जो कुल दान का आधे से अधिक हिस्सा है, जो भारत में बड़े पैमाने पर व्यक्तिगत दान की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।


परोपकार सूची में महिला दानदाताओं का योगदान भी तेज़ी से बढ़ा है। इस वर्ष, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की पत्नी रोहिणी नीलेकणि ₹204 करोड़ के दान के साथ सबसे उदार महिला परोपकारी बनकर उभरी हैं। उनका दान शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र निर्माण पर केंद्रित है। रोहिणी नीलेकणि ने 'गिविंग प्लेज' पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत उन्होंने अपनी आधी संपत्ति परोपकारी कार्यों के लिए देने का संकल्प लिया है। उनके बाद, बायोकॉन की संस्थापक किरण मजूमदार-शॉ ₹83 करोड़ के दान के साथ दूसरी सबसे उदार महिला परोपकारी रहीं। महिलाओं का यह बढ़ता नेतृत्व दिखाता है कि वे भारत के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


भारत में परोपकार का मुख्य फोकस लगातार शिक्षा पर बना हुआ है, जिसने 107 दानदाताओं से ₹4,166 करोड़ का सबसे अधिक योगदान आकर्षित किया है। शिव नाडर, मुकेश अंबानी, बजाज परिवार और गौतम अडानी सहित कई शीर्ष दानदाताओं ने शिक्षा को अपनी प्राथमिक दान प्राथमिकता बनाया है। यह दर्शाता है कि भारत के उद्योगपति देश के भविष्य के निर्माण के लिए ज्ञान और कौशल के महत्व को समझते हैं। मुंबई अभी भी भारत की परोपकार राजधानी बना हुआ है, जहां 28% बड़े दानदाता निवास करते हैं। जैसे-जैसे भारत में धन सृजन और आर्थिक विकास बढ़ रहा है, वैसे-वैसे परोपकार की सीमा भी विस्तृत हो रही है, जिससे यह उम्मीद की जाती है कि आने वाले वर्षों में और अधिक भारतीय समाज के उत्थान के लिए आगे आएंगे।