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अमेरिका में 8 महीने बाद ब्याज दर में 0.25% कटौती|

आठ महीने के लंबे अंतराल के बाद, अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व, ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों में 0.25% की महत्वपूर्ण कटौती की है। इस फैसले ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक नई उम्मीद जगाई है, और इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कटौती से विदेशी संस्थागत निवेशकों  के लिए भारतीय बाजारों में निवेश करना और अधिक आकर्षक हो जाएगा। जब अमेरिका में ब्याज दरें कम होती हैं, तो निवेशकों को वहां कम रिटर्न मिलता है, जिससे वे अधिक रिटर्न की तलाश में भारत जैसे उभरते बाजारों का रुख करते हैं। इस पूंजी के प्रवाह से भारतीय शेयरों में खरीददारी बढ़ सकती है, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बनेगा और सेंसेक्स व निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में तेजी देखी जा सकती है।


इसके अतिरिक्त, इस कटौती का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संभावित मंदी की आशंकाओं को कम करने का एक प्रयास है। फेडरल रिजर्व ने यह कदम आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। यदि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव वैश्विक व्यापार और भारतीय निर्यात पर भी पड़ेगा। हालांकि, इस कटौती का असर केवल शेयर बाजार तक ही सीमित नहीं है; यह डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो रुपये को मजबूती मिलती है, जिससे भारत के लिए आयात करना सस्ता हो जाता है। कुल मिलाकर, अमेरिका में ब्याज दर में यह कटौती भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए एक शुभ संकेत है, जो आने वाले समय में निवेशकों के बीच विश्वास को बढ़ा सकती है और बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है।