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भारत में आईटी क्षेत्र पर एआई का बढ़ता प्रभाव: टीसीएस और अन्य भारतीय कंपनियों की छंटनी के कारण और आगे की रणनीति का विश्लेषण

साल २०२५ टेक इंडस्ट्री के लिए बड़े बदलाव और अनिश्चितता का साल साबित हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटो

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साल २०२५ टेक इंडस्ट्री के लिए बड़े बदलाव और अनिश्चितता का साल साबित हो रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन की तेज रफ्तार के चलते कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर लागत नियंत्रण और पुनर्गठन किए जाने के कारण वैश्विक स्तर पर अब तक १ लाख से अधिक कर्मचारियों को अपनी नौकरी गँवानी पड़ी है। इस छंटनी की लहर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। डेटा ट्रैकिंग वेबसाइट Layoffs.fyi के अनुसार, अब तक २१८ से अधिक टेक कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है।


इस बड़े पैमाने पर हुई छंटनी के पीछे सबसे प्रमुख कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता इस्तेमाल है। कंपनियां अब एआई-आधारित प्रणालियों को अपनाने और परिचालन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दे रही हैं, जिससे कई पारंपरिक और मध्य स्तरीय भूमिकाओं की आवश्यकता कम हो गई है। उदाहरण के लिए, सेल्सफोर्स ने ग्राहकों के साथ बातचीत को स्वचालित करने के लिए एआई के बढ़ते उपयोग के कारण हजारों ग्राहक सहायता नौकरियों में कटौती की। इसी तरह, अमेजन के सीईओ एंडी जेसी ने भी एआई-संचालित प्रक्रियाओं में बदलाव को छंटनी के प्रमुख कारणों में से एक बताया है।


भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस भी इस ट्रेंड से अछूती नहीं रही। कंपनी ने सितंबर २०२५ को समाप्त तिमाही में लगभग २०,००० कर्मचारियों की छंटनी की है, जो कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ी तिमाही कटौती है। टीसीएस ने इस कटौती को एआई-आधारित पुनर्गठन और कौशल अंतराल के कारण बताया है। यह दर्शाता है कि एआई का प्रभाव अब केवल अमेरिकी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।


छंटनी की इस सूची में अन्य प्रमुख कंपनियों में इंटेल (लगभग २४,००० पद), अमेजन (१४,००० से अधिक कॉर्पोरेट पद), और माइक्रोसॉफ्ट (लगभग ९,००० पद) शामिल हैं। इन सभी कंपनियों ने अपने संसाधनों को क्लाउड, साइबर सुरक्षा और विशेष रूप से एआई अनुसंधान और बुनियादी ढांचे में स्थानांतरित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है। कंपनियों का यह कदम लागत बचत और एआई-संचालित विकास पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है। कई कंपनियों के सीईओ का मानना है कि एआई युग में टीम का आकार छोटा, लेकिन ज्यादा सक्षम होना चाहिए।


हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापक छंटनी ओवर-हायरिंग (महामारी के दौरान अत्यधिक भर्ती) और वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे कारकों का भी परिणाम है। फिर भी, एआई का उदय एक नया कौशल युद्ध पैदा कर रहा है। कंपनियों के लिए अब चुनौती है कि वे अपने मौजूदा कर्मचारियों को नई एआई-संचालित भूमिकाओं के लिए रीस्किल करें, जबकि कई मध्य-स्तरीय भूमिकाएं ऑटोमेशन के कारण खत्म होने के कगार पर हैं। यह स्थिति टेक पेशेवरों को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए लगातार नए कौशल सीखने के लिए मजबूर कर रही है।


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