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बाजार में आई गिरावट: सेंसेक्स 174 अंक टूटकर 82,327 पर थमा, निफ्टी 58 अंक नीचे

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का दिन निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। लगातार तेजी के बाद, बेंचमार्क सूचकांकों सेंसे

सेंसेक्स गिरावट,  निफ्टी फिसला,  शेयर बाजार में गिरावट,  174 अंक टूटा,  82, 327 पर बंद,  निफ्टी 58 अंक नीचे,  आईटी और एफएमसीजी बिकवाली,  कमजोर वैश्विक संकेत,  बाजार में मुनाफावसूली

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का दिन निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा। लगातार तेजी के बाद, बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान पर बंद हुए, जिससे बाजार में बिकवाली का स्पष्ट दबाव दिखा। प्रमुख रूप से आईटी (IT) और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर के शेयरों में हुई मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने बाजार की गति को धीमा कर दिया।


बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 174 अंक टूटकर 82,327 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक भी 58 अंक फिसलकर 25,000 के नीचे आ गया। यह गिरावट बाजार में पिछले कई दिनों से जारी तेजी के बाद हुई, जिसे निवेशक मुनाफावसूली का एक सामान्य चरण मान रहे हैं।


बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण सेक्टर विशेष में आई बिकवाली रही। आईटी सेक्टर (सूचना प्रौद्योगिकी) के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। विदेशी बाजारों में आई तकनीकी शेयरों की गिरावट और रुपये के मजबूत होने की आशंकाओं के चलते टीसीएस (TCS), इंफोसिस और विप्रो जैसी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली की। इसी तरह, एफएमसीजी सेक्टर (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) के शेयरों में भी बिकवाली हावी रही। बढ़ती लागत और ग्रामीण मांग में संभावित कमी की चिंताओं ने हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) और आईटीसी (ITC) जैसे दिग्गजों के शेयरों को नीचे खींच लिया। इसके विपरीत, कुछ सीमित सेक्टर्स, जैसे कि फार्मा और ऊर्जा, में हल्की खरीदारी देखने को मिली, लेकिन वे समग्र गिरावट को रोकने में कामयाब नहीं हो सके।


भारतीय बाजार को प्रभावित करने वाला एक अन्य प्रमुख कारक कमजोर वैश्विक संकेत रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों पर अनिश्चितता जारी रहने से एशियाई और यूरोपीय बाजारों में गिरावट का माहौल रहा। इसका सीधा असर भारतीय इक्विटी बाजार पर पड़ा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भी कुछ सेक्टर्स में सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली जारी रखी, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।


विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट बाजार के लिए एक स्वस्थ सुधार (Healthy Correction) हो सकती है, जो अत्यधिक मूल्यांकन वाले शेयरों से मुनाफावसूली को दर्शाती है। हालांकि, निवेशकों को अब आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजों, महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के फैसलों पर बारीकी से नजर रखनी होगी। सेंसेक्स का 82,327 पर बंद होना यह संकेत देता है कि निवेशक ऊपरी स्तरों पर सतर्क हो गए हैं और अब वे मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं। बाजार की आगे की दिशा वैश्विक आर्थिक स्थिरता और प्रमुख कंपनियों के आगामी प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।



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