कतर्नियाघाट में वन्यजीवों की मौतें, वन विभाग सतर्क
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में बीते 13 दिनों में तीन बड़े वन्यजीवों की मौत से हड़कंप मच गया है। 1 फरवरी को गेरूआ नदी के टापू पर एक बाघ मृत पाया गया, 7 फरवरी को एक तेंदुए का शव मिला और 13 फरवरी को एक हाथी की भी मौत हो गई। इन लगातार हो रही मौतों से वन विभाग में चिंता बढ़ गई है और इस मामले की गहन जांच की जा रही है।
मौतों के कारणों की जांच जारी
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग अपने समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ प्रजातियों के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल ही में हुई घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती पेश की है। वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम इन मौतों के पीछे के संभावित कारणों की जांच कर रही है।
बाघ की मौत के मामले में प्राथमिक रिपोर्ट में किसी गंभीर चोट का संकेत नहीं मिला है, जिससे ज़हर देने या प्राकृतिक कारणों की आशंका जताई जा रही है। वहीं, तेंदुए की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है, और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हाथी की मौत के पीछे संक्रमण या उम्र संबंधी कारण हो सकते हैं, लेकिन इसकी भी जांच की जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण पर मंडराता संकट
कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व क्षेत्र का हिस्सा है और यह नेपाल सीमा के करीब स्थित है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही आम बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिकारियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, मानव-वन्यजीव संघर्ष भी एक बड़ा कारण हो सकता है, क्योंकि हाल के वर्षों में जंगलों में अतिक्रमण और अवैध गतिविधियाँ बढ़ी हैं।
वन विभाग की कड़ी निगरानी
वन विभाग ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए निगरानी तेज कर दी है। जंगल में गश्त बढ़ा दी गई है और ड्रोन कैमरों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन घटनाओं के बाद वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है। वन्यजीवों की रहस्यमयी मौतों का सच सामने आने के बाद ही सही कदम उठाए जा सकेंगे, लेकिन इन घटनाओं ने वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।